राजनीति

दस नहीं, बस एक चाहिए

एक थे पहलवानजी। नई-नई शादी हुई थी। सुहागरात पर उन्होंने अपनी पत्नी से बड़े ही प्यार से पूछा- पंजा लड़ाएगी?

पूरा देश जब पाकिस्तान से अपने फौजियों की शहादत का हिसाब मांग रहा है तो हमारे प्रधानमंत्री कुछ वैसे ही पाकिस्तानियों (पाकिस्तान को नहीं) को चुनौती दे रहे हैं – आइए, गरीबी से लड़ाई लड़ते हैं। देखते हैं, गरीबी पहले कौन हटाता है आप या हम? आइए, बोरोजगारी से लड़ाई लड़ें और देखें, बेरोजगारी पहले आप दूर करते हैं या हम? आइए, अशिक्षा के खिलाफ लड़ाई लड़कर दिखाते हैं कि अशिक्षा पहले आप खत्म करते हैं कि हम? गनीमत है कि इस लड़ाई का संदर्भ उन्होंने गरीबी से लेकर बेकारी तक को ही बनाया, दुश्मन को क्रिकेट, कबड़्डी, खोखो या फिर रमी के लिए नहीं ललकारा। उनसे यह नहीं कहा कि आइए, ओक्का-बोक्का खेलते हैं, देखते हैं आप जीतते हैं कि हम? 56 इंच की छाती की दुहाई देनेवाले हमारे इस नेता ने न जाने क्यों आज अपना रंग बदल लिया है? एक के बदले दस सिर काट लाने की ललकार लगाने वाले हमारे नेता ने कुर्सी पर बैठते ही जाने क्यों अपना राग बदल लिया है? जिस मोदी के लिए हमने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए थे, वह निश्चय ही कोई और था।

जी हां, हमें गरीबी, बेकारी, अशिक्षा सबसे ही लड़ाई लड़नी है। बेशक लड़नी है, लेकिन इसके लिए हमें पाकिस्तान से उलझने की जरूरत नहीं है। यदि प्रधानमंत्रीजी ने ये चुनौतियां अपने ही देश के सभी प्रांतो के सामने रखी होतीं कि देखें गरीबी, भुखमरी, बेकारी और अशिक्षा के खिलाफ जंग में किस प्रदेश की जीत होती है तो उनके बीच एक स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता पनपती और विकास की दिशा में इसका विशेष मायने होता, पर पाकिस्तान की आवाम को इनके लिए ललकारने से भला क्या सिद्ध होगा? जब पाकिस्तान हमारे घर में घुसकर हमारे सैनिकों को मार रहा हो, तब हम उसकी आवाम से गरीबी से लड़ने की प्रतिद्वंद्विता की बात करें, यह स्थितियों से मुंह चुराना है। यदि मोदी जी को दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय विकास की इतनी ही चिन्ता है तो वह उस दिन भी झलकनी चाहिए थी, जब वह एक के बदले दस सिर काट लाने के वायदे कर रहे थे। दुश्मन को सबक सिखाने के लिए मनमोहन सरकार का पैमाना कुछ हो और मोदी सरकार कुछ और, ऐसा तो नहीं हो सकता। खेल के जो नियम खुद मोदीजी ने बनाए हैं, उनका पालन तो उन्हें करना ही पड़ेगा।

पाकिस्तान से लड़ाई के खतरों का भान हमें है। लेकिन क्या यह भान मोदी जी को नहीं था, जब वह देश को अपनी 56 इंच की छाती का भरोसा दे रहे थे? जी हां, हम युद्ध नहीं चाहते, विकास चाहते हैं, लेकिन दुश्मन जब हमें हमारे घर में घुसकर मार रहा हो तो क्या हम विकास के बारे में सोच भी सकते हैं? कभी-कभी विकास के लिए भी युद्ध आवश्यक हो रहता है। यदि ऐसा नहीं होता तो हमारी आस्था के प्राण भगवान श्रीकृष्ण मोहपाश में जकड़े अर्जुन को युद्ध के लिए तैयार न करते। यह कभी न कहते उससे कि उठो पार्थ, गांडीव संभालो। फिर भी हम लड़ाई नहीं चाहते। पाकिस्तान से तो क्या, किसी से भी नहीं चाहते और ना ही किसी और को लड़ाना चाहते हैं। भारत का यह चरित्र बिलकुल ही नहीं है। परन्तु हम यह भी नहीं चाहते कि कोई हमारा मान मर्दन करे। हम कदापि नहीं चाहते कि कोई हमारी संप्रभुता पर चोट करे। और यदि कोई ऐसा करता है तो हमें अधिकार है कि हम उसे उसका माकूल जवाब दे।

मुझे ही क्यों, पूरे देश को ही संतोष होता यदि मोदीजी ने कोझिकोड के उस मंच से पाकिस्तानी आवाम को संबोधित करने की बजाय पाकिस्तान के नेतृत्व को संबोधित किया होता कि हमें तो हाफिज सईद का सिर चाहिए। तुम्ही बताओ, तुम लाकर दोगे या हम खुद आकर लें? हमें ही क्यों, पूरी दुनिया को भी खुशी होती यदि हमारे प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के नेतृत्व को ललकारा होता कि यह तुम तय करो कि तुम्हारी सरजमीं पर चलनेवाले आतंकी शिविरों को तुम खुद खत्म करोगे या हम आकर करें? जी हां, हमें एक के बदले दस सिर नहीं चाहिए। हमें तो उरी में शहीद उन अठारह जबानों के सिरों के बदले सिर्फ एक सिर ही चाहिए – हाफिज सईद का। हमें पाकिस्तान पर हमला कर के किसी भी निर्दोष की जान नहीं लेनी है, हम तो सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान में चलाए जा रहे आतंकी शिविरों को नेस्तनाबूत देखना चाहते हैं। ऐसा करने की बजाय हमारे प्रधानमंत्री यदि भारत-पाक गरीबी उन्मूलन प्रतियोगिता कराएंगे तो स्वाभाविक तौर से हमें उस पहलवान की याद हो आएगी, जिसने समय, स्थान एवं संदर्भ का ख्याल किए बिना अपनी पत्नी से पूछा था – पंजा लड़ाएगी?

6 thoughts on “दस नहीं, बस एक चाहिए”

  1. यह पूर्णतः सटीक टिप्पणी है। रंजनजी आपने दूध का दूध व पानी का पानी कर दिया।

    1. एकतरफा बयान है सिर्फ अपनी भावनाओं को लिखा। कृष्ण ने पांडवों अज्ञातवाश में सबल और शक्ति संपन्न बनाकर ही युद्ध में ललकारा।अभी भारतीय सेना युद्ध को झेल नहीं सकती।काफी नुकसान उठानी पड़ेगी। कारगिल की क्षति भूल गये क्या।आज पाकिस्तान कारगिल के बाद सैन्य स्तर पर काफी आगे है।मत भूलिए चीन भी उसके साथ मिलकर छद्म युद्ध कर सकता है। भारत की पूर्ववर्ती सरकारें सिर्फ घोटालों और देश को लूटने में ही रही।इनकी नीतियों के कारण हर विभाग में पाक का स्लिपर सेल बन चुका है।जिस पर इस सरकार ने ध्यान दिया।उसका असर भी देखने को मिला।सैन्य शक्ति को बढ़ावा देने के लिए भी काम हो रहें हैं ।समय लगेगा हठात सब नहीं होता ।हमारा दुर्भाग्य है कि देश के बुद्धिजीवी वर्ग का एक तबका भी पाक को लाभ पहुँचा रहा है।भारत की आंतरिक स्थिति भी अच्छी नहीं हैं।सभी पार्टियाँ देश की जगह अपनी और पार्टी को चमकने में लगी है। इस स्थिति से बाहर आकर ही हमें तैयारी करनी होगी ।हमारे नागरिक भी जोश में हैं होश में नहीं इन्हें उत्तरदायित्व का बोध नहीं है।ये अराजकता की ओर अग्रसर होती दिखती है।ये भी देश के लिए बड़ी खतरा हैं।अंततः धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय।अपने देश के प्रति समस्त उतरदायित्वो का निर्वाह ईमानदारी से करें।एक समर्पित नागरिक बनें और भारत को आंतरिक तौर पर सबल बनाएँ।तब जाके बाह्य दुश्मनो को जीत सकते हैं।

      1. आप कह रहे हैं इस देश के नागरिक होश में नही हैं। आपका क्या तात्पर्य है – क्या मोदी जी भी चुनाव के पहले होश में नहीं थे? दूसरी बात अगर हमारी सेना युद्ध के लिए तैयार नहीं है तो ईसके लिए कौन जिम्मेदार है। अगर यह सच है तो जिम्मेदारी स्थापित करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए। यह भी देखना होगा कि पिछले 28 महीने के मोदी सरकार के कार्यकाल में हमारी फौज को दुश्मनों से सामना करने के लिए क्या पुरजोर कार्यवाही की गई।

  2. एक दुखद उत्तर: आप एक आतंकवादी हमले में सफल रहे लेकिन हम भी नियंत्रण रेखा पर ऐसे 17 हमलों को रोकने में सफल रहे है। आपने हमारे18 सैनिकों को मार दिया, लेकिन हमने भी 110 घुसपैठियों को मार गिराया है ….. आप युद्ध चाहते हैं … मैं इस चुनौती को स्वीकार करता हूँ….आइये हम गरीबी और अज्ञानता के खिलाफ युद्ध छेडे और देखें यह युद्ध कौन जीतता है…..यह राष्ट्र उरी के शहीदों को कभी नहीं भूलेगा। हमारी सेना आतंकवादियों से लड़ने के लिये और सर्वोच्च बलिदान के लिए हमेशा तैयार है ….

    क्या यह एक आतंकवादी देश के लिए भारत का पैगाम है?

    बुद्धम शरणम गच्छामि जैसे सन्देश का हिजबुल के आकाओं पर कोई असर नहीं होगा….1000 वर्ष का युद्ध एक तरफ रखिये….इस अंदाज़ का नतीजा साफ़ दिख रहा है, जो पिछले 60-70 साल से हो रहा है वो अब और भयानक रूप ले लेगा….लगता है हमारे नेता कश्मीर को इराक , सीरिया बना के ही छोड़ेंगे।

  3. Un मे किसी भी अन्य देश का समर्थन नही । सिंधु पर पिछे हटना पड़ा । MFN की समीक्षा भी देश की जनता को बेवकुफ बनाने के लिये । पाकिस्तान युद्ध की तैयारी कर रहा है हम समीक्षा कर रहे है ।

  4. Prathviraj chohan ko gauri kbhi hra nhi paaya aur kbhi bhi harane ki kuvat rakhta tha hajar saal yudh krke bhi vo keval prajay ka hi aalingn krta lekin kya kre jab apne hi gaddr ho aur jaychand ne Marva diya veer ko…. Ab jab koi phli baar deshbhakt neta aaya hai to apne kide ki aaukat vale bhi dil ko jla dete hai rastr ko jala dete hai… Kjrival kanhiya. ..ovesi.. Maya.. Malaym. Kongres. Bspa Maya.. Lalu… Bhalu. Jitne bhi saare voot bank… Mai LGE hai agar bhagwan bhi aakr koi karya krta hai to be Ye nakal hi nikalenge… Ab apno se kaise lde koi… Kya krega modi jb apne khol denge dhoti…. Np

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