Sushant Singh Rajput
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14 जून को क्या सुशान्त वाकई अशान्त था?

अब यह तो सीबीआई ही बता सकती है कि सुशान्त सिंह राजपूत की हत्या हुई थी या फिर उसने आत्महत्या की थी परन्तु जैविक लय या बायोरिद्म की मानें को 14 जून 2010 को जब सुशान्त ने अपनी आखिरी सांसे लीं, उस दिन वह भावात्मक तथा बोद्धिक दोनों तौर से बेहद कमजोर था, जबकि शारीरिक तौर पर काफी सशक्त था।

दरअसल, किसी भी व्यक्ति के जन्म के साथ ही उसकी शारीरिक, भावनात्मक तथा बोद्धिक क्षमताओं से जुड़े चक्र भी चालू हो जाते हैं, जो हर दिन घटते-बढ़ते रहते हैं। उनका यह घटना और बढ़ना लयबद्ध होता है जिसे बायोरिद्म कहा जाता है। ये तीनों ही चक्र गोल-गोल नहीं घूमते, बल्कि 0 से 1 और फिर 0 से -1 होते हुए 0 पर आकर एक चक्र खत्म हो जाता है और दूसरा चक्र शुरु हो जाता है। एक शारीरिक चक्र जहां 23 दिनों में पूरा होता है, वहीं एक भावात्मक चक्र 28 दिनों का होता है जबकि एक बौद्धिक चक्र को पूरा होने में 33 दिन लग जाते हैं।

जन्म के दिन तीनों ही चक्र 0 से शुरु होते हैं, पर अलग-अलग चक्रावधि के कारण वे साथ-साथ नहीं चलते। ये तीनों ही चक्र 1 से -1 के बीच ही चलते हैं। जब वे 1 पर होते हैं तो सबसे मजबूत होते हैं और जब -1 पर होते हैं तो सबसे कमजोर। उसी तरह चक्र जब ऊर्द्धगामी होता है यानी कि ऊपर को जा रहा होता है तो उसे अधोगामी या नीचे की ओर जाते हुए चक्र से बेहतर माना जाता है।

शारीरिक चक्र व्यक्ति की ताकत, सहनशक्ति तथा जिजीविषा से जुड़ा होता है। 1 पर पहुंचकर वह सबसे अधिक स्वस्थ महसूस करता है, जबकि -1 पर पहुंचकर अपने को थका हुआ और कमजोर महसूस करता है। भावात्मक चक्र व्यक्ति की मनोदशा तथा संवेदनशीलता से जुड़ा होता है। वह अगर 1 पर हो तो व्यक्ति खुद को खुश पाता है और वह भावात्मक तौर पर स्थिरता भी रहता है। दूसरी ओर -1 पर पहुंचकर वह उदास और अशान्त होने लगता है। बौद्धिक चक्र व्यक्ति की सोच और एकाग्रता के जुड़ा होता है। 1 पर पहुंचकर उसके विश्लेषण की क्षमता बढ़ी हुई होती जबकि -1 पर वह खुद को सही निर्णय लेने की स्थिति में नहीं पाता और गलत कर बैठता है।

Biorhythm of Sushant Singh Rajputसाथ के चित्र में सुशान्त सिंह राजपूत का जैविक लय 12 जून 2020 से लेकर 16 जूलाई 2020 तक के लिए दिखाया गया है। 14 जून को बिन्दु के जरिये दिखाया गया है। 21 जनवरी 1986 को जन्में सुशान्त सिंह राजपूत का शारीरिक चक्र 14 जून 2020 को 0.97 पर था, जबकि उनका भावात्मक चक्र -0.90 पर तथा बौद्धिक चक्र -0.94 पर था। साथ ही शारीरिक चक्र जहां 1 की तरफ चढ़ रहा था, वहीं भावात्मक एवं बोद्धिक चक्र दोनों ही नीचे की तरफ उतर रहे थे। कुल मिलाकर 14 जून 2020 को उनका शारीरिक, भावात्मक तथा बोद्धिक स्तर आत्मघाती था। हालांकि फिलहाल यह कहना ही सही होगा कि सुशान्त का जैविक लय या बायोरिद्म आत्महत्या की परिस्थितियां बनानेवाला था, भले ही उनकी मौत की वजह आत्महत्या न रही हो। साथ के चित्र पर गौर करें तो हम पाएंगे कि 24 जून 2020 के बाद उनकी मनोदशा संभल गई होती।

यह भी देखा जाता रहा है कि यदि किसी के जैविक लय के शारीरिक, भावात्मक तथा बोद्धिक चक्र तीनों ही -1 के आसपास होते हैं तो वह दुर्घटना का शिकार बन जाता है। अनेक विमान दुर्घटनाओं में विमान चालकों का शारीरिक, भावात्मक तथा बोद्धिक स्तर -1 के करीब पाया गया है। स्वाभाविक है कि ऐसी स्थिति में उनकी प्रतिक्रियाएं ढीली पड़ जाती हैं और वे मुश्किल स्थिति का सामना सही तरीके से नहीं कर पाते। सुशान्त के मामले में चूंकि उसकी शारीरिक क्षमता कमजोर नहीं पड़ी थी, वह आत्महत्या करने की स्थिति में था, भले ही उसने ऐसा किया न हो।

इसके अलावा, सुशान्त और रिया जब 18 जून 2020 को अलग हुए थे, उस दिन दोनों के संबंध जैविक लय के आधार पर सुसंगत नहीं थे। इस पैमाने पर भी विभिन्न चक्र 1 से -1 के बीच ही रहते  हैं, पर 0 के पास चक्र के होने पर किसी दम्पत्ति को सुसंगत माना जाता है और 1 या -1 के पास होने पर असंगत। जाहि्र है कि रोज के हिसाब से यह भी बदलता रहता है। इस हिसाब से 8 जून को दोनों का भावात्मक  चक्र 0.99 पर था, जोकि बेहद खराब है। इसी तरह उनके शारीरिक (0.57) और बोद्धिक (0.58) चक्र भी 1 के ही करीब थे, जो कोई अच्छी स्थिति नहीं कही जा सकती।

इस आलेख का मकसद यह तय करना हर्गिज नहीं है कि सुशान्त ने आत्महत्या की थी या उनकी हत्या की गई थी, बल्कि सिर्फ यह दिखाना है कि बायोरिद्म के नियम इस मामले में पूरी तरह से सही उतरते हैं। अगर उसने आत्महत्या न भी की हो तो भी हम निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि भावात्मक तथा बौद्धिक तौर पर सुशान्त उस दिन बेहद कमजोर पड़ गए थे।

रंजन कुमार सिंह
लेखक-पत्रकार-फिल्मकार रंजन कुमार सिंह ने नवभारत टाइम्स से सफर शुरु कर टीवी की दुनिया में कदम बढ़ाया। अनके टीवी कार्यक्रम का निर्माण-निर्देशन करने के साथ ही वह अब तक आठ पुस्तकों की रचना कर चुके हैं, जिनमें से तीन हिन्दी की तथा शेष अंग्रेजी की हैं। देश-विदेश में वह भारतीय कला-संस्कृति तथा भारतीय हिन्दू दर्शन पर व्याख्यान के लिए भी बुलाए जाते रहे हैं। वह अनेक शिक्षा संस्थानों तता अकादमियों से भी जुड़े रहे हैं।

One thought on “14 जून को क्या सुशान्त वाकई अशान्त था?

  1. Sushant ke bare mein biorythmic graph is something new for me. Editor is diverse in his knowledge. I m really impressed. Good analysis.

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