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गर्व ही नहीं,  चिंतन का क्षण भी 

रमेश जोशी भारत के एक दृढ़ निश्चयी नायक, स्वतंत्रता सेनानी. प्रथम प्रधानमंत्री और लौह-पुरुष के नाम से विख्यात सरदार पटेल की लगभग तीन हजार करोड़ रुपए की लागत से निर्मित, दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा का उनके १४४ वें जन्म दिन ३१ अक्तूबर को बड़े तामझाम से लोकार्पण हुआ |पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और जीवन […]

संस्कृति

मॉरीशस में हिंदी विदूषी का छलका दर्द

शिवाजी सिंह विश्व हिन्दी सम्मेलन के भव्य आयोजन से जहां मॉरीशस में विलुप्त होने की ओर बढ़ रही हिन्दी के प्रचार प्रसार को नयी उर्जा भले ही मिली हो लेकिन एक युवा हिन्दी सेवी जो उमंग के साथ उसमें हिस्सा लेने गयी थी उसे घोर निराशा हुई और वह हिन्दी के प्रति आयोजकों के रवैये […]

संस्कृति

मॉरीशस में डोडो की तरह कहीं भोजपुरी न विलुप्त हो जाए

शिवाजी सिंह हिंद महासागर के ‘छोटे भारत’ मॉरीशस में ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि उनके राष्ट्रीय पक्षी ‘डोडो’ की तरह यहां हिंदी एवं भोजपुरी भाषा और भारतीय संस्कृति विलुप्त नहीं होगी। मॉरीशस के स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में 18 से 20 अगस्त तक चले 11वें विश्व हिंदी […]

समाज संस्कृति

भाषा और संस्कृति – कुछ विचार

(11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन के अवसर पर विशेष) शंकर दयाल सिंह भाषा और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं या अनुपूरक? जहां भाषा हमारे भावों को अभिव्यक्तिक चेतना प्रदान करती है, वहां संस्कृति मानवीय गरिमा और सांस्कृतिक सौष्ठव की संवाहिका है। इसे इस रूप में भी कहा या समझा जा सकता है कि भाषा की भी […]