समाज संस्कृति

भाषा और संस्कृति – कुछ विचार

(11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन के अवसर पर विशेष) शंकर दयाल सिंह भाषा और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं या अनुपूरक? जहां भाषा हमारे भावों को अभिव्यक्तिक चेतना प्रदान करती है, वहां संस्कृति मानवीय गरिमा और सांस्कृतिक सौष्ठव की संवाहिका है। इसे इस रूप में भी कहा या समझा जा सकता है कि भाषा की भी […]

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मुठभेड़ फर्जी या तर्क?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक भोपाल की मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों को लेकर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई है। एक-दो प्रमुख राजनीतिक दलों के सिवाय सभी दल उस मुठभेड़ को फर्जी बताने पर तुल पड़े हैं। सारे भाजपा-विरोधी नेताओं के बयान पढ़ने पर ऐसा लगता है कि मप्र सरकार ने गजब का षडयंत्र किया है। यदि नेताओं […]

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दीपावली पर विशेष

दीपावली पर हम अपने पाठकों के लिए यह खास प्रस्तुति लेकर आए हैं। सच पूछिए तो यह अमेरिका की दीवाली है, जो हर साल आतिशबाजियों के साथ 4 जुलाई को मनाई जाती है। लगभग वहां के हरेक शहर की नदी के दोनों किनारों पर खड़े होकर लाखों लोग इसका आनन्द लेते हैं। यह पिछली 4 […]

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आरक्षण पर चन्द सवाल

ललित शास्त्री लोग पदोन्नति में आरक्षण का विरोध करने के लिए मध्यप्रदेश की सड़कों पर निकल आए पिच्यानवां संविधान संशोधन, जिसे आधिकारिक तौर पर संविधान (95 वां संशोधन ) अधिनियम, 2009, के रूप में जाना जाता है, के द्वारा लोकसभा व विधानसभाओं में अनुसूचित जनजाति व् अनुसुचित जाति व आंग्ल भारतीयों के लिए आरक्षण में […]

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हमें क्या देकर जाएगी दिवाली?

रचना सिंह कहने को दीपावली अपने साथ खुशियां लेकर आती है, लेकिन सच यह है कि हमें प्रदूषण देकर जाती है। पटाखों से वायु प्रदूषण तो होता ही है, उससे भी बढ़कर ध्वनि प्रदूषण होता है। और इन दोनों का दुष्परिणाम हम दीपावली के काफी बाद तक भुगतने के लिए बाध्य रहते हैं। वैसे तो […]