हीरा लाल बाछोतिया
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डॉ0 हीरालाल बाछोतिया नहीं रहे

शंकर संस्कृति प्रतिष्ठान के संस्थापक महासचिव, सुप्रसिद्ध साहित्यकार, भाषाविद, शिक्षाविद एवं हिंदी सेवी डॉ हीरालाल बाछोतिया का गत 25 मई को 86 साल की उम्र में निधन हो गया।

3 जुलाई 1934 को मध्य प्रदेश के टिमरनी गांव में जन्मे डा बाछोतिया ने प्रारंभ में बेतूल में अध्यापन किया और बाद में एनसीईआरटी में हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दीं। साहित्यकार-सांसद स्व0 शंकर दयाल सिंह की स्मृति में उन्होंने उनके परिवार के साथ मिलकर शंकर संस्कृति प्रतिष्ठान की स्थापना की थी और अपनी अस्वस्थता के बावजूद उसके कार्यों एवं आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे थे।

डॉ बाछोतिया ने पांच उपन्यास, तीन काव्य संग्रह, छह समालोचना ग्रंथ, छह भाषा परक ग्रंथ , तीन यात्रा वृत्तांत और एक नाट्य कृति की रचना कर हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया था। वह गिल्ड के सलाहकार, भाषा अभियान, जिला हिंदी साहित्य समिति और नेहरू आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज बेतूल के संस्थापक भी रहे।

उनकी स्मृति में आथर्स गिल्ड आफ़ इंडिया के तत्वावधान में शोकसभा का आयोजन किया गया, जिसका संयोजन गिल्ड के महासचिव डॉ0 शिवशंकर अवस्थी ने किया और उसकी अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री डॉ श्याम सिंह शशि ने की।

कोरोना काल में यह आयोजन ऑनलाइन हुआ, जिसमें राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के निदेशक डॉ0 दिलीप सिंह, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के निदेशक डॉ नारायण कुमार, डॉ0 बाछोतिया के अभिनंदन ग्रंथ भाषा विमर्श के संपादक डॉ0 हरिसिंह पाल, अखिल भारतीय कवि सभा के अध्यक्ष डॉ इन्द्र सेंगर,गिल्ड के हैदराबाद चैप्टर की डॉ0 अहिल्या मिश्रा, नागपुर चैप्टर के नरेन्द्र सिंह परिहार, आगरा चैप्टर के डॉ0 अमीआधार निडर, कर्नाटक के सुगंध हिंदूराव घरपडकर, कोल्हापुर विश्वविद्यालय के डॉ0 अर्जुन चाव्हाण, प्रख्यात हास्य कवयित्री डॉ0 सरोजनी प्रीतम, इंदौर की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ0 कला जोशी, गोवा की ज्योति कुलकर्णी, एनसीईआरटी के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ0 रामजन्म शर्मा, रतलाम के डॉ0 पूरन सहगल, झांसी के वरिष्ठ अधिवक्ता सी बी सिंह, मध्य प्रदेश के रामअवतार सिंह, राजेन्द्र बाराह, सुलभ साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ0 अशोक कुमार ज्योति, दिल्ली की प्रमिला नैयर, नीतू सिंह सहित अनेक स्नेही मित्रों ने डॉ बाछोतिया के मिलनसार स्वभाव एवं सहयोग भावना का संस्मरण करते हुए अपने-अपने घरों से ही उन्हें वीडियो भावांजलि अर्पित की। डॉ0 बाछोतिया के सुपुत्र एवं पूर्व वैज्ञानिक डॉ0 चेतनकुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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