समाज संस्कृति

लालच बुरी बला

रंजन कुमार सिंह जीवन की पहली प्रतिक्रिया भूख के तौर पर प्रकट होती है। बच्चा रोता है तो माँ समझ लेती है कि उसे भूख लगी है। सभी जीव-जन्तुओं की भूख उनके पेट के अनुपात एवं आवश्यकता से संचालित होती है। एकमात्र मनुष्य ही ऐसा जीव है जिसकी भूख उसकी शारीरिक आवश्यकता से संचालित या […]

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दशावतार : मानवता के विकास की कहानी

रंजन कुमार सिंह धर्मं का निरूपण शास्त्र द्वारा होता है। शास्त्र वस्तुतः दर्शन हैं, जो किसी भी धर्म को परिभाषित करते हैं। परन्तु, अपने स्वरुप की विशिष्टता के कारण वे कठिन होते हैं। कठिन धार्मिक सिद्धांतों को आम जन के लिए सरल बनाने के लिए आख्यानकों का सहारा लिया जाता है। यानी कथा-कहानियों के माध्यम […]

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बॉलीवुड पर आतंक का साया

रंजन कुमार सिंह कुछ दिनों पहले हमने बिहार में मेट्रिक के सर्टिफिकेट बिकते देखे थे और अब महाराष्ट्र में देशभक्ति का सर्टिफिकेट बिकता भी देख लिया। सेना कल्याण कोष में पाँच करोड़ रुपए मात्र जमा कराने को राज़ी होकर करण जौहर रातों-रात देशद्रोही से देशप्रेमी हो गए। राज ठाकरे की नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना […]

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नाचना थोड़े ही छोड़ दूंगा – पं0 बिरजू महाराज

राजेन्‍द्र उपाध्‍याय यों तो पंडारा रोड के मेरे घर के अगल-बगल में अनेक बड़े-बड़े अफसर, मंत्री, सांसद रहते हैं, जो कभी एक दूसरे से नहीं बोलते। अपने कुत्‍तों को घुमाते हुए दिख जाते हैं। शादी-ब्‍याह, खुशी-गमी में भी नहीं बुलाते। पर मैंने सुना है कभी यहां रंगकर्मी ब.व.कारथ, शुभा मुदगल आदि कलाकार भी रहते थे। […]

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वे बीज हैं, पर बोरों में पड़े हैं

हाल ही में हिन्दी सिनेमा. या यूं कहें कि भारतीय सिनेमा के दो दिग्गज पटना के किसी मंच पर साथ-साथ थे – सुप्रसिद्ध गीतकार एवं निर्देशक गुलज़ार और सिनेमा से लेकर टेलिविज़न तक का सफर तय करनेवाले सफल निर्देशक-फिल्मकार श्याम बेनेगल। अवसर था बिहार की राजधानी पटना में एक नए सांस्कृतिक केन्द्र के शिलांयास का। […]