देश समाज संस्कृति

लोकतंत्र को खोखला होता देखना उनके लिए मुश्किल था

अटलजी नहीं रहे। उनके साथ ही लोकतंत्र का एक सुन्दर अध्याय भी समाप्त हो गया – एक ऐसा अध्याय जिसमें भाषा की मधुरता और भावों का बल था। नहीं पता कि इसके बाद कोई और कभी लिख पाएगा ऐसा अध्याय। जिस तरह भारतीय संस्कृति विविधताओं से भरी हुई है, वैसे ही भारतीय राजनीति विचित्रताओं से […]

समाज संस्कृति

भाषा और संस्कृति – कुछ विचार

(11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन के अवसर पर विशेष) शंकर दयाल सिंह भाषा और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं या अनुपूरक? जहां भाषा हमारे भावों को अभिव्यक्तिक चेतना प्रदान करती है, वहां संस्कृति मानवीय गरिमा और सांस्कृतिक सौष्ठव की संवाहिका है। इसे इस रूप में भी कहा या समझा जा सकता है कि भाषा की भी […]

समाज संस्कृति

मॉरिशस, हम आ रहल बानी!

मॉरिशस से मुझे पत्र मिला है, आदरणीय श्री रंजन कुमार सिंह जी, ११वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सहभागिता हेतु भारत तथा अन्य देशों से मॉरीशस पधारने वाले सभी हिंदी प्रेमियों का स्वागत करने के लिए हम भी उत्साहित हैं| इस देश में आपके आवास को सुखद बनाने के लिए यथाशक्ति प्रयास किया जाएगा| सादर डॉ […]

अन्य समाज संस्कृति

लो फिर आ गया नया साल!

फिर नया साल आ गया। पुराना साल पीछे छूट गया। कहनेवाले कह सकते हैं कि साल अभी नहीं लगा है। वह तो शुरु होगा चैत्र के पहले दिन से। हिन्दू पंचांग के अनुसार बात करें तो उनकी बात गलत भी नहीं। शक संवत शुरु होता है चैत्र के पहले दिन से ही। लेकिन फिर शक […]

समाज

कौशल के क्षेत्र में विश्व विजेता बनने की चाह

करन दस साल का ही था, जब बालों के साथ उसका रोमांस शुरु हो गया। एक दिन उसने अपने बाल खुद ही काट डाले और फिर खुद को शीशे में निहारता रहा। उसे लगा कि कुछ गलत हो गया है तो फिर से अपने बालों पर कैची चला दी। कभी सामने से तो कभी किनारे […]