समाज

आरक्षण पर चन्द सवाल

ललित शास्त्री लोग पदोन्नति में आरक्षण का विरोध करने के लिए मध्यप्रदेश की सड़कों पर निकल आए पिच्यानवां संविधान संशोधन, जिसे आधिकारिक तौर पर संविधान (95 वां संशोधन ) अधिनियम, 2009, के रूप में जाना जाता है, के द्वारा लोकसभा व विधानसभाओं में अनुसूचित जनजाति व् अनुसुचित जाति व आंग्ल भारतीयों के लिए आरक्षण में […]

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“मरने वाला मेरा बेटा था जनाब”

51 दिनों के बाद आखिरकार कश्मीर में कर्फ्यू हटा दिया गया। हालांकि मामला शान्त हो गया है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। कर्फ्यू के हटाए जाते ही श्रीनगर के बटमालू में फिर से प्रदर्शन शुरु हो गए। ऐसे में वहां फिर से कर्फ्यू लगाना पड़ा। पिछली 8 जुलाई को बुरहन वानी के मारे जाने के […]

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एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों

लक्ष्य था कम से कम 20 पदक लेना, पर मिले केवल दो और पदक तालिका में हम 67वें स्थान पर रह गए। इससे पहले हमने चाहा था 125 पदक लेकर ग्लासगो राष्ट्रकुल खेलों में अपना तीसरा स्थान सुनिश्चित करना, पर मिले सिर्फ 64 और हमें पांचवे स्थान से ही संतोष करना पड़ा। इसी तरह इचीयोन […]

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दीपा हमें माफ कर दो

मैं भारत का एक अदना सा नागरिक, रंजन कुमार सिंह, अपनी ओर से और अपनी औकात से बाहर जाकर पूरे देश और उसकी जनता की और से रियो ओलंपिक में शामिल अपने सभी खिलाड़ियों से क्षमा मांगता हूं कि हमने समय रहते उनपर ध्यान नहीं दिया, बल्कि उन्हें नजरअंदाज ही किया। वह चाहे दीपा करमाकर […]

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जीते चाहे कोई, हारती है जनता

भारतीय लोकतंत्र में आप अल्पसंख्यक होकर तो रह सकते हैं, पर असंगठित होकर नहीं. आप खुद कितने ही काबिल क्यों न हो, आपकी पहचान जमात या फिर छाप से होती है, आपकी योग्यता और ईमानदारी से नहीं. वोटर भी यहाँ जीतने वाले घोड़े पर दांव लगाना चाहते है, हारने वाले पर नहीं. और इस जीत-हार […]