समाज संस्कृति

भाषा और संस्कृति – कुछ विचार

(11वें विश्व हिन्दी सम्मेलन के अवसर पर विशेष) शंकर दयाल सिंह भाषा और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं या अनुपूरक? जहां भाषा हमारे भावों को अभिव्यक्तिक चेतना प्रदान करती है, वहां संस्कृति मानवीय गरिमा और सांस्कृतिक सौष्ठव की संवाहिका है। इसे इस रूप में भी कहा या समझा जा सकता है कि भाषा की भी […]

समाज संस्कृति

मॉरिशस, हम आ रहल बानी!

मॉरिशस से मुझे पत्र मिला है, आदरणीय श्री रंजन कुमार सिंह जी, ११वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सहभागिता हेतु भारत तथा अन्य देशों से मॉरीशस पधारने वाले सभी हिंदी प्रेमियों का स्वागत करने के लिए हम भी उत्साहित हैं| इस देश में आपके आवास को सुखद बनाने के लिए यथाशक्ति प्रयास किया जाएगा| सादर डॉ […]

अन्य समाज संस्कृति

लो फिर आ गया नया साल!

फिर नया साल आ गया। पुराना साल पीछे छूट गया। कहनेवाले कह सकते हैं कि साल अभी नहीं लगा है। वह तो शुरु होगा चैत्र के पहले दिन से। हिन्दू पंचांग के अनुसार बात करें तो उनकी बात गलत भी नहीं। शक संवत शुरु होता है चैत्र के पहले दिन से ही। लेकिन फिर शक […]

समाज

कौशल के क्षेत्र में विश्व विजेता बनने की चाह

करन दस साल का ही था, जब बालों के साथ उसका रोमांस शुरु हो गया। एक दिन उसने अपने बाल खुद ही काट डाले और फिर खुद को शीशे में निहारता रहा। उसे लगा कि कुछ गलत हो गया है तो फिर से अपने बालों पर कैची चला दी। कभी सामने से तो कभी किनारे […]

समाज

बेटी हुई तो क्या हुआ

बिना दरवाजा वाले इस मकान को देखकर कौन भला समझेगा कि यहां कोई बैंक अधिकारी रहता है। बल्कि रहता नहीं, रहती है। पटना के कुर्जी मुहल्ले की कुम्हार गली में स्थित इस मकान को बाहर से ही देखकर उसमें रहनेवालों की दयनीय स्थिति का ज्ञान हो जाता है। भीतर भी कुछ ठीक-ठाक नहीं है। सिर्फ […]