Newly introduced Indian Currency
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उनकी भी सोचिए जिनके पास है पैसा, पासबुक में नहीं

रंजन कुमार सिंह परेशानियां तो हो रही हैं। सरकार चाहे जितना ही कह ले और सत्ता पक्ष चाहे जितना ही झुठला दे, सच तो यही है कि लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हां, कुछ इसे हंसकर सह रहे हैं तो कुछ कुढ़कर, पर सहना तो दोनों को ही पड़ रहा है। […]

Rupees 1000 Note
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चलाए न चलेंगे 500 और 1000 के नोट

रंजन कुमार सिंह आधी रात में लाखों-करोड़ों रुपये कागज के रंगीन टुकड़ों में बदल गए। जैसे सूई चुभाकर कोई शरीर से खून निकाल लेता है, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक कठोर फैसले ने 500 तथा 1000 रुपयों के नोटों से उनका मूल्य निकाल दिया है। अब इन नोटों से कोई खरीद-बिक्री नहीं की […]

Rupees 500 Note
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काला धन और मोदी का मास्टर स्ट्रोक

मधुरेन्द्र सिन्हा नरेन्द्र मोदी की यह खासियत रही है कि वह सरप्राइज के मास्टर प्लेयर हैं। उनके पास हमेशा कोई न कोई सरप्राइज़ रहता है जिनसे वह न केवल अपनों को बल्कि विपक्षियों को भी हैरान कर देते हैं। इस बार उन्होंने 500 और 1,000 रुपए के नोट बंद करके सभी की बोलती बंद कर […]

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जीएसटी नहीं आसान, समझ लीजिए

मधुरेन्द्र सिन्हा जिस उत्साह से वित्त मंत्रालय जीएसटी (गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स) को लागू करने का प्रयास कर रहा है, उसे देखकर लगता है कि वह यह मान बैठा है कि यह उन्हें आर्थिक संकटों से मुक्त कर देगा। देश भर में एक समान टैक्स और उसके दोहरीकरण की दिशा में यह सचमुच बहुत बड़ा […]

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मुठभेड़ फर्जी या तर्क?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक भोपाल की मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों को लेकर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई है। एक-दो प्रमुख राजनीतिक दलों के सिवाय सभी दल उस मुठभेड़ को फर्जी बताने पर तुल पड़े हैं। सारे भाजपा-विरोधी नेताओं के बयान पढ़ने पर ऐसा लगता है कि मप्र सरकार ने गजब का षडयंत्र किया है। यदि नेताओं […]

Tata Group
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टाटा समूह – आगे क्या?

मधुरेन्द्र सिन्हा भारत के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी समूह टाटा समूह में अप्रत्याशित घटना घटी। समूह ने अपने चेयरमैन को ही निकालने का फैसला किया। यह बेहद हैरान कर देने वाली बात थी क्योंकि चेयरमैन की चुनाव प्रक्रिया लंबी थी और उसके लिए कई पेंच थे। आखिरकार साइरस मिस्त्री का चयन हुआ। साइरस दूसरे गैर टाटा थे […]

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दीपावली पर विशेष

दीपावली पर हम अपने पाठकों के लिए यह खास प्रस्तुति लेकर आए हैं। सच पूछिए तो यह अमेरिका की दीवाली है, जो हर साल आतिशबाजियों के साथ 4 जुलाई को मनाई जाती है। लगभग वहां के हरेक शहर की नदी के दोनों किनारों पर खड़े होकर लाखों लोग इसका आनन्द लेते हैं। यह पिछली 4 […]