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सांत्वना और सहानुभूति से हटकर सफलता पर नजर

सांत्वना और सहानुभूति जादू की वह छड़ी है जो असफलता के क्षणों में किसी को बल दे सकती है। लेकिन सौ में से सौ अंक पाने को ही सफलता मान लेना हमारी भारी भूल है। 99 अंक पानेवाले को सांत्वना नहीं दी जाती, बल्कि बधाई दी जाती है। और यहीं हमसे चूक हो गई। सांत्वना […]

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किसी और से संभाले नहीं संभलेगी वह बिन्दी

शीला दीक्षित का चले जाना अभी ताजा ही था कि सुषमा स्वराज भी हमारे बीच से चली गई। आज की विद्रूप होती जा रही राजनीति में दोनों महिलाएं शालीनता की प्रतिमूर्ति थीं। दोनों पर ही कीचड़ उछाले जाते रहे, पर दोनों में से किसी ने भी अपनी शालीनता नहीं छोड़ी। इस बात को अभी एक […]

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सौम्यता और ममता की मूर्ति

सौम्यता को यदि मूर्त रूप दिया जा सकता तो वह संभवतः शीला दीक्षित जैसी दीख पड़ती। ममता को कोई और नाम देने के लिए मुझे कहा जाए तो मैं उसे शीला दीक्षित का ही नाम देना चाहूंगा। वह राजनीति के पंक में गहरे तक डूबी हुई थीं, पर उनका स्‍नेहसिक्त व्यक्तित्व उन्हें राजनीति के कलुष […]

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गर्व ही नहीं,  चिंतन का क्षण भी 

रमेश जोशी भारत के एक दृढ़ निश्चयी नायक, स्वतंत्रता सेनानी. प्रथम प्रधानमंत्री और लौह-पुरुष के नाम से विख्यात सरदार पटेल की लगभग तीन हजार करोड़ रुपए की लागत से निर्मित, दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा का उनके १४४ वें जन्म दिन ३१ अक्तूबर को बड़े तामझाम से लोकार्पण हुआ |पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और जीवन […]