साहित्य

हे द्रोण, धनुर्धर धन्य, किन्तु क्रीत दास तुम राजसदन के – रंजन कुमार सिंह

भारतीय संस्कृति में शिक्षा की अवधारणा न होकर विद्या की अवधारणा है। शिक्षा जहां सेवा उद्योग का विषय है, जिसे खरीदा और बेचा जा सकता है, वहीं हमारे यहां विद्या दान की परंपरा रही है, जो किसी खरीद-फरोख्त से कोसो दूर है। यह कहना था लेखक-पत्रकार-फिल्म निर्माता रंजन कुमार सिंह का। वह राजधानी दिल्ली में […]