साहित्य

लेखकीय संघर्ष में कोई बाइपास नहीं होता

 डॉ. देविना अक्षयवर शिमला! ‘क्वीन ऑफ़ द हिल्स!’ अँग्रेज़ों के ज़माने से ही इस नाम से प्रसिद्ध यह शहर अपने प्राकृतिक सौंदर्य, शीत जलवायु और ऐतिहासिक एवं भौगोलिक विशेषताओं के चलते एक महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल रहा है। अमूमन हम शिमला को भी इसी रूप में जानते हैं और यही समझते हैं कि यह शहर तो […]

साहित्य

लॉक डाउन

रंजन कुमार सिंह टूटे चप्पलों के साथ चलना मुश्किल हो गया तो वह बीच सड़क पर ही बैठ गई। सामने उसका मरद दो साल के बच्चे को सिर पर सम्हाले चला जा रहा था। आगे दूर क्षितिज पर कुछ धुंधली आकृतियां दिखाई पड़ रही थीं। वह चाह कर भी उनके साथ कदम से कदम नहीं […]

संस्कृति

मॉरीशस में डोडो की तरह कहीं भोजपुरी न विलुप्त हो जाए

शिवाजी सिंह हिंद महासागर के ‘छोटे भारत’ मॉरीशस में ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि उनके राष्ट्रीय पक्षी ‘डोडो’ की तरह यहां हिंदी एवं भोजपुरी भाषा और भारतीय संस्कृति विलुप्त नहीं होगी। मॉरीशस के स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में 18 से 20 अगस्त तक चले 11वें विश्व हिंदी […]

समाज संस्कृति

मॉरिशस, हम आ रहल बानी!

मॉरिशस से मुझे पत्र मिला है, आदरणीय श्री रंजन कुमार सिंह जी, ११वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सहभागिता हेतु भारत तथा अन्य देशों से मॉरीशस पधारने वाले सभी हिंदी प्रेमियों का स्वागत करने के लिए हम भी उत्साहित हैं| इस देश में आपके आवास को सुखद बनाने के लिए यथाशक्ति प्रयास किया जाएगा| सादर डॉ […]

अन्य संस्कृति

प्रतापी पुरखों को समर्पित है यह विश्व हिन्दी सम्मेलन

द्वितीय विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन मॉरिशस की राजधानी पोर्ट लुई में 28 से 30 अगस्त 1976 को हुआ था। नागपुर में हुए प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन के आयोजन के डेढ़ साल के भीतर ही। भारत में संपन्न प्रथम सम्मेलन की आयोजन समिति के अध्यक्ष तत्कालीन उपराष्ट्रपति श्री बी0डी0 जत्ती थे, तो पोर्ट लुई में […]