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दिलचस्प है इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव

रंजन कुमार सिंह

इस बार का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव बेहद दिलचस्प और रोमांचक है। सिर्फ इसलिए नहीं कि इस बार रिपब्लिकन तथा डेमोक्रेट के बीच कांटे की टक्कर है, बल्कि इसलिए भी कि आम अमेरिकी दोनों में से किसी के उम्मीदवार को पसंद नहीं कर रहे। जो डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलरी क्लिंटन को नापसंद करते हैं, वे मजबूरन रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन कर रहे हैं और जो ट्रम्प से नफरत करते हैं, वे मजबूरन क्लिंटन के साथ हैं। कुल मिलाकर, आम अमेरिकी जनता न तो ट्रम्प के साथ है और ना ही क्लिंटन के साथ। दोनों को ही अपने समर्थन के वोट से ज्यादा दूसरे के विरोध के वोट का आसरा है।

दोनों में चाहे कोई जीते, इतना तो तय है कि अमेरिका का 45 वां राष्ट्रपति अभूतपूर्व होगा। 70 वर्षीय डोनाल्ड ट्रम्प अगर अमेरिकी राष्ट्रपतियों में सबसे उम्रदराज होंगे, तो हिलरी क्लिंटन अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति होंगी। इन दोनों ही उम्मीदवारों का संबंध न्यू यार्क से है। वैसे तो चुनाव मैदान में कुछ और उम्मीदवार भी हैं, पर मुकाबला इन्ही दोनों के बीच है। अमेरिकी इतिहास में आज तक रिपब्लिकन या डेमोक्रेट के अलावा किसी तीसरे दल का या निर्दलीय उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव जीत भी नहीं पाया है।

ट्रम्प का अमेरिका में बड़ा कारोबार है। फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार दुनिया भर के 325 अमीरों में उनकी गिनती है, जबकि अमेरिका के पूंजीपतियों में उनका स्थान 156वां है। जमीन-जायदाद में निवेश करने के अलावा वह टीवी रियाल्टी शो के निर्माता तथा प्रस्तुतकर्ता रह चुके हैं। वह होटल, रिसोर्ट के साथ-साथ अनेक जुआ घर के भी मालिक हैं। पिछले दिनों मैं अमेरिका गया तो वहां के एटलांटिक सिटी में ट्र्म्प ताजमहल नामक जुआ घर देखकर काफी प्रभावित हुआ था। इसमें मुझे उनका भारत प्रेम नजर आया था। हालांकि बाद में मालूम हुआ कि ताज महल नाम से भारत के प्रति उनके नजरिये का कोई संबंध नहीं है। ताज महल कसीनो को ही खरीदकर उन्होंने उसका नाम ट्रम्प ताज महल रख दिया था।

उधर हिलरी क्लिंटन अमेरिका के 42 वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी होने के अलावा खुद भी अमेरिका में मंत्री रह चुकी हैं। वह अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति हों, न हों, अनेक मामलों में वह अभूतपूर्व रही हैं। 2001 में अमेरिकी सिनेट के लिए चुनी जाने वाली वह ऐसी पहली महिला थीं, जो किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी रही हों। 2009 से 2013 के बीच वह अमेरिका की सेक्रेटरी ऑफ स्टेट भी रहीं। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट वहां गृह मंत्री या होम मिनिस्टर को कहते हैं। लगभग 30 साल पहले मैं जब पहली बार अमेरिका गया था तो वहां मुझे एक भारतीय मूल के सज्जन मिले, जिन्होंने खुद को मिनिस्टर बताया। अनजाने में मैंने उनसे राजनीति और सरकार की चर्चा की तो उन्होंने मुस्कुरा कर बताया कि यहां मिनिस्टर हमारे यहां के मंत्री को नहीं कहते, बल्कि चर्च के पादरी को कहते हैं। जिसे हम मंत्री या मिनिस्टर कहते हैं, उसे यहां सेक्रेटरी कहते हैं। जबकि भारत में सेक्रेटरी हम सचिव को कहते हैं, जो सरकार का नहीं, प्रशासन का अंग होता है।

हिलरी क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रम्प लम्बे अर्से से अमेरिका का राष्ट्रपति होने की इच्छा पाले हुए हैं। क्लिंटन पिछला चुनाव लड़ना चाहती थीं, पर बराक ओबामा की लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें डेमोक्रेट पार्टी की ओर से उम्मीदवारी की दौड़ से भी अपना नाम खींच लेना पड़ा था। यह दीगर बात है कि ओबामा ने उन्हें अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं मानकर सरकार में अपना सहयोगी बना लिया और 2009 से 20013 तक वह उनके मंत्रिमंडल का सदस्य रहीं। ओबामा वैसे भी अब अमेरिकी संविधान के अनुसार लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति का चुनाव नहीं लड़ सकते और ऐसे में हिलरी क्लिंटन डेमोक्रेट  उम्मीदवार बन कर उभरी हैं। इसी तरह डोनाल्ड ट्रम्प 2000 में ही अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते थे। तब वह रिफार्म पार्टी के उम्मीदवार थे। पर मतदान के ठीक पहले ही उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था। अब वह रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। रिपब्लिकन पार्टी को ट्रम्प की तरह के धनिकों या पूंजीपतियों की पार्टी माना जाता है। इसलिए चुनाव लड़ने के लिए उनके पास पैसों की कमी नहीं होती, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी को धन बल से अधिक जन बल का सहारा रहता है। हिलरी क्लिंटन के नाम पर वह जन बल डिगा हुआ है।

आम अमेरिकी दोनों में से किसी को भी अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के तौर पर नहीं देखना चाहते, पर इन्हीं में से एक को चुनना उनकी मजबूरी है। अमेरिकी इसे अमेरिका का दुर्भाग्य ही मान रहे हैं कि दोनों में से कोई एक देश का अगला राष्ट्रपति होगा। ट्रम्प हमेशा अपने विवादास्पद बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। खासकर महिलाओं के प्रति उनका रवैया तो एक हद तक शर्मनाक कहा जा सकता है। यहां तक कि वह अपनी पुत्री के बारे में कह चुके हैं कि “अगर इवांका मेरी बेटी नहीं होती तो मैं उसके साथ भी मौज-मस्ती (डेटिंग) कर सकता था।” इसी तरह अपनी प्रतिद्वंद्वी हिलरी क्लिंटन के लिए उन्होंने कहा कि “जो अपने पति को संतुष्ट नहीं रख सकी, वह अमेरिका को कैसे संतुष्ट रखेगी?” यहां याद करा दूं कि उनके पति बिल क्लिंटन, व्हाइट हाउस में काम करनेवाली मोनिका लेविंस्की के साथ अपने विवाहेतर संबंधों की वजह से चर्चित रहे थे और पति-पत्नी के रिश्तों में इस वजह से कटुता भी आई थी। उधर हिलरी क्लिंटन को भी आम अमेरिकी भोरोसे के लायक नहीं मानते। उनके प्रतिद्वंद्वी तो उन्हें अपराधी सिद्ध करने में लगे हैं क्योंकि उन्होंने नियमों के विरुद्ध अपने निजी ईमेल आईडी से कुछ सरकारी ईमेल भेजे थे।

इतना तय है कि 8 नवम्बर को होने जा रहे चुनाव का नतीजा चाहे जो हो, अमेरिका का अगला राष्ट्रपति न तो वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरह लोकप्रिय होगा और ना ही उतना विश्वसनीय। ऐसे में अमेरिका के अगले चार साल कैसे गुजरेंगे, यह देखने लायक होगा।

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