Rupees 500 Note
अन्य

काला धन और मोदी का मास्टर स्ट्रोक

मधुरेन्द्र सिन्हा

नरेन्द्र मोदी की यह खासियत रही है कि वह सरप्राइज के मास्टर प्लेयर हैं। उनके पास हमेशा कोई न कोई सरप्राइज़ रहता है जिनसे वह न केवल अपनों को बल्कि विपक्षियों को भी हैरान कर देते हैं। इस बार उन्होंने 500 और 1,000 रुपए के नोट बंद करके सभी की बोलती बंद कर दी है। सभी हैरान हैं कि यह कैसे हो गया? लेकिन जो लोग पीएम मोदी को जानते हैं वे यह भी जानते हैं कि वह काले धन को समाप्त करने की मुहिम में काफी अर्से से लगे हुए हैं। इसी कड़ी में यह कदम उठाया गया है। अब 500 और 1000 के पुराने नोटों का चलन बंद कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे काले धन और आंतकवाद के लिए लाये जा रहे धन पर अंकुश लगेगा। इतना ही नहीं पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के जाली नोट भारत में सप्लाई करने पर भी नकेल कस जाएगी।

अब इसका पहला असर तो यह हो रहा है कि इस समय पूरे देश में अफरातफरी का माहौल है और लोग चारों ओर दौड़ रहे हैं। बैंक बंद हैं और एटीएम भी। ऐसे में पैसे आएंगे तो कहां से, यह सवाल सभी के मन को मथ रहा है। ऑटो-टैक्सी वालों से लोकर सब्जी बेचने वालों तक को खासी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। कोई बड़े नोट लेने को तैयार नहीं है। हालत बेहद बुरी है। बड़े शहरों में तो लोगों को सोशल मीडिया के जरिए काफी कुछ समझ में आ गया है और वो आने वाले दिनों में अपने पैसे बैंकों में डाल देंगे और निकाल भी लेंगे। लेकिन छोटे शहरों और गांवों में क्या होगा, यह समझना भी मुश्किल है।

बहरहाल पीएम मोदी ने चुनाव के ऐन पहले यह बड़ा कदम उठाकर विपक्षी दलों को करारा झटका दिया है। उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनाव होने वाले हैं और वहां इस के मद्देनज़र बड़े पैमाने पर धन इकट्ठा किया गया है। यह राशि अरबों रुपए में हो सकती है। इस कदम से उन पार्टियों को भारी धक्का लगेगा और वे उस तरह से अपने खेल नहीं कर पाएंगी। इस समय 500 और 1,000 रुपए के नोटों को बंद करने का एक बड़ा कारण यह भी हो सकता है। लेकिन एक बात तो तय है कि इसकी तैयारी कम से कम छह महीनों से चल रही थी और सरकार ने अचानक यह घोषणा करके सभी को हैरान कर दिया।

आलोचकों का कहना है कि पूर्व में सरकारों ने ऐसे कदम उठाए थे लेकिन उनका वांछित फल नहीं मिला। इंदिरा गांधी ने भी ऐसा किया था और 1977-78 में जनता पार्टी ने भी। लेकिन काले धन पर कोई खास अंकुश नहीं लग पाया और थोड़े दिनों बाद सभी कुछ सामान्य हो गया। दरअसल बड़े पैमाने पर काला धन बैंकों और कंपनियों के जरिये इधर-उधर हो जाता है। ये सारा काला धन नकद में नहीं आता है बल्कि बैंकों के जरिए ही आता है। स्विस बैंकों या दुबई में पैसे नकद नहीं जमा होते हैं बल्कि ट्रांसफर के जरिचे होते हैं। जाली कंपनियां इसके लिए खड़ी की जाती हैं और उनके जरिये काला धन इधर-उधर हो जाता है। अंडरवॉयसिंग और ओवरवॉयसिंग के जरिये भी काल धन पैदा होता है। बाद में वह एफडीआई. पार्टिसिपेटरी नोट वगैरह के जरिये देश में आ जाता है। बड़े खिलाड़ी अपने पास नकदी के ढेर नहीं लगा कर रखते हैं। काला धन खत्म करने के लिए इस तरह की व्यवस्था पर नकेल लगाने की जरूरत है।

इस तरह के कदम से आम जनता खास कर मिडल क्लास को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा जो उचित नहीं है। सरकार को कुछ और राहत देनी चाहिए। बैंकों से महज चार हजार रुपए निकलाने की व्यवस्था में ढील देनी चाहिए। कम से कम दस हजार रुपए निकालने की व्यवस्था होनी चाहिए।

बहरहाल इस कदम से काले धन पर थोडी बहुत चोट जरूर पहुंचेगी लेकिन ऐसा भी कुछ नहीं होगा कि उस पर लगाम ही लग जाए। फिर भी पीएम मोदी के इस कदम की कुछ तो सराहना तो करनी ही पड़ेगी कि उन्होंने एक साहसिक कदम उठाया है।

One thought on “काला धन और मोदी का मास्टर स्ट्रोक

अपनी बात यहां लिखें