संस्कृति साहित्य

विक्रम संवत के बहाने, परमार वंश का गौरव बोध

आज सुबह से ही वाट्सऐप पर हिन्दू वर्षारंभ की शुभकामनाएं मिल रही हैं। हिन्दू वर्षारंभ यानी विक्रम संवत का प्रथम दिवस। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होनेवाले इस वर्ष को विक्रम संवत भी कहते हैं और विक्रमी भी। संवत यानी भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित काल गणना। कहते हैं कि सम्राट विक्रमादित्य ने मालवा में शकों […]

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जब भी कुछ लिखा, उनकी याद आई

श्री फणीश्वर नाथ रेणु उनको पहली बार देख कर बिना किसी से पूछे समझ लिया था, आप निश्चय ही बिहार के प्रसिद्ध राजघराना के सदस्य हैं, जो जमींदारी प्रथा समाप्त होने के पहले ही राजनैतिक घराना में बदल चुका है। अतः उनको देखते ही मेरी आँखों के सामने राजा की पार्टी का झंडा आ जाता, और कानों […]

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लेखकीय संघर्ष में कोई बाइपास नहीं होता

 डॉ. देविना अक्षयवर शिमला! ‘क्वीन ऑफ़ द हिल्स!’ अँग्रेज़ों के ज़माने से ही इस नाम से प्रसिद्ध यह शहर अपने प्राकृतिक सौंदर्य, शीत जलवायु और ऐतिहासिक एवं भौगोलिक विशेषताओं के चलते एक महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल रहा है। अमूमन हम शिमला को भी इसी रूप में जानते हैं और यही समझते हैं कि यह शहर तो […]

पेंगांग लेक
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पेंगांग त्सो और चीनी होटल

ऊपर आप जो चित्र देख रहे हैं, वह पेंगांग त्सो का है। त्सो लद्दाखी में झील या लेक को कहते हैं। यानी यह पेंगांग लेक है, जो इन दिनों खबरों में बना हुआ है। मैं यहां तीन बार जा चुका हूं और हर बार मैंने इसे नए नजरिये से देखा है। पहली बार मैं यहां […]

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लॉक डाउन

रंजन कुमार सिंह टूटे चप्पलों के साथ चलना मुश्किल हो गया तो वह बीच सड़क पर ही बैठ गई। सामने उसका मरद दो साल के बच्चे को सिर पर सम्हाले चला जा रहा था। आगे दूर क्षितिज पर कुछ धुंधली आकृतियां दिखाई पड़ रही थीं। वह चाह कर भी उनके साथ कदम से कदम नहीं […]